समर्पित 
स्व० ममतामयी माँ को
स्व० ममतामयी माँ - बसंत देशमुख

बेचकर मुस्कान अपनी हर सुबह
अश्क  आँखों   के  खरीदेंगे  कभी
चाँद   तारे  तोड़कर   आकाश  से
माँग   धरती  की   सँवारेंगे कभी

निवेदन
मेरे प्रथम काव्य संग्रह 'मुखरित मौन' को आप सबने जैसा स्नेह  दिया है उससे मैं अभिभूत हूँ ! आपके उसी स्नेह और  प्यार ने मेरी लेखनी को सतत तराशने और धारदार बनाने में अमिट भूमिका निभाई है ! उसका परिणाम आपके समक्ष 'गीतों की बस्ती कहाँ पर बसाएँ' के रूप में प्रस्तुत है ! आशा ही नहीं विश्वास भी है की यह संग्रह आपको वांछित मानसिक आहार के साथ स्वस्थ साहित्यिक एवं वैचारिक धरातल प्रदान करने में सक्षम साबित होग़ा !


दीपावली                                                                                                  उत्तरापेक्षी
१९९४                                                                                                      बसंत देशमुख 



बसंत देशमुख






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