सबको गले लगाकर जीना

जीवन के हर पल से खेलो
जीवन कोई जुँआ नहीं है

बुने साँस के ताने बाने
कब टूटे कोई न जाने
सबको गले लगाकर जीना
जाने हो या हो अनजाने

जाने कब कैसा घट जाये
अब तक जैसा हुआ नहीं है

गैरों को अपनापन देना 
बदले में कुछ भी न लेना 
डूब रहे जो मझधारों में 
उन तक अपनी नैया खेना

जिनको दवा नहीं दे सकते 
देता क्यों तू दुआ नहीं है ।

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