लब पर नाम अब तुम्हारा है

लब पर नाम अब तुम्हारा है
बस   जरा  देर  से  पुकारा है

धड़कनें आपकी अमानत हैं- 
बस पूजा में दिन  गुजारा है 

दर्द से जिन्दगी सँवरती है 
इसलिए  हादसे   गंवारा है

हम छू लेंगे आसमानों को-
आज ये हौसला  हमारा है

तेरी साँसों में कैसी खुशबू है
वक्त तुमने  कहाँ  गुजारा है

गीत इतरा रहे फिजाओं में 
सरगमों ने उन्हें दुलारा है

मौत से जीतकर जो लौटा 
अब वो जिन्दगी से हारा है


:-:- बसंत देशमुख -:-:-

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