सीधा है बाहर से अन्दर से भला होगा

सीधा है बाहर से अन्दर से  भला होगा
गैरों ने उसे लूटा  अपनों ने छला होगा

पीता है छाँछ को भी वह  फूंक  फूंक कर के 
मुमकिन है दूध से वह पहले ही जला होगा

सीने में नहीं होगा  दिल  एक  झोपड़ी  का 
रहता है जिस मकान में वह पंचतला होगा

उस आदमी का  काटा  पानी  भी न माँगे 
जो आदमी साँपों के आस्तीन पला होगा

गजलें लिखी मिलेंगी कमसिन से शरीरों पर 
मकते  का शेर नीचे ऊपर में मतला  होगा

:-:- बसंत देशमुख -:-:-

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