नाम अपना लिखा लीजिए

नाम   अपना   लिखा लीजिए 
कुछ  करिश्मा  दिखा  दीजिए 

लोग  कहते   हैं  जीना   किसे 
आप  जीकर   दिखा   दीजिए

वक्त    बदलेगा    तेवर   कभी 
आप   कलमें   उठा    लीजिए

आँधियों  की  तरह   चल पड़ो 
बिजलियाँ कुछ गिरा  दीजिए

एड़ियाँ   घिस    गयी  भागते 
डिग्रियाँ   सब  जला   दीजिए

उनके   आने  की  है   राह   ये 
अपनी पलकें   बिछा   दीजिए

तुम न   चलना  मेरी  राह पर 
नक़्शे  पा   सब  मिटा दीजिए

लोग   पागल    तुम्हें    देखने- 
अपना   घूंघट   उठा   लीजिए 

चौक   पर   लाश   है   बेकफन 
चंद    चिथड़े    जुटा    लीजिए

खेल कब  का  खतम  हो  चुका 
अब   तो   पर्दे   गिरा    दीजिए

रात   में    साँस     बाकी   नहीं 
अब तो   शम्मा  बुझा   दीजिए

ठोकरों से   ही   सीखा   है   सब 
और   ठोकर     लगा     दीजिए 

उसने  माँगी   है   जन्नत  कहाँ 
नर्क   में    ही     बुला    लीजिए

शख्स इक मिट गया मुल्क पर
अपनी  पलकें   भिंगा   लीजिए


:-:- बसंत देशमुख -:-:-

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