हाथ में मेंहदी
महावर पाँव में हो
कोर काजल की
पलक की छाँव में हो
पलक की छाँव में हो
होंठ पर मासूम
सी हो मुस्कुराहट
खेलती हो आँख में
कोई शरारत
कोई शरारत
वक्ष मंदिर के
कलश से सिर उठाये
क्षीण कटि में बाँध
कर कामुक अदायें
कलश से सिर उठाये
क्षीण कटि में बाँध
कर कामुक अदायें
अधखिले कुछ
फूल जूड़े में सजाकर
लाजवंती की तरह
लाजवंती की तरह
किंचित लजाकर
नववधू सी आज
घूँघट काढ़ आना
बनके फागुन
वो मेरी आषाढ़ आना
घूँघट काढ़ आना
बनके फागुन
वो मेरी आषाढ़ आना
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