भाई आपको क्या हुआ है
इधर खाई उधर कुँआ है
इधर खाई उधर कुँआ है
कहीं न कहीं लगी है आग
बस्ती में धुँआ ही धुँआ है
गाँव में खुशी हो या मातम
सियार का हुँआ ही हुँआ है
कोयल को ताकता कौआ
मैना को ताकता सुआ है
यूँ तो मिलते हैं हर रोज
न तो सलाम है न दुआ है
जिनगी ने जनम भर दुत्कारा
मौत ने प्यार से छुआ है
सम्हलकर खेलना नादान
जिन्दगी भी एक जुआ है
:-:- बसंत देशमुख -:-:-
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