चुरायी जिन्होंने गुलों की जवानी

चुरायी  जिन्होंने   गुलों   की   जवानी 
उन्हीं को चमन की मिली निगहबानी

नेता है  लूला  लंगड़ों  के दल  का 
अंधों को करनी है अब  अगवानी

रुला के  किसी को  आँसू पे  हँसना 
है  हुजूर   का  ये   शौक  खानदानी

खेतों  की  फसलें  भले सूख जाये 
हरियाली शहरों की रहे बागवानी

दिल है आज इस पे तो कल है किसी पे 
ये दिल है या तुगलक  की  है  राजधानी


:-:- बसंत देशमुख -:-:-

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