उनके हाथों में अभी सत्ता है

उनके हाथों में अभी सत्ता  है 
उनके हाथों तुरुप का पत्ता है

ज्ञान ध्यान धरे रहो झोले में
आजकल पैसे  की  महत्ता है

पैसों के चक्रव्यूह  में फँसकर
वोट, अभिमन्यु सा निहत्था है

सामने आंधियों का है जमघट
उदास एक सूखा हुआ पत्ता है

सबसे पीछे हैं कामधाम में जो 
खाने  में  वही  अकड़धत्ता है

खून के दाग लगे कपड़ों में 
थानेदारों ने कहा कत्था है


 -:-:- बसंत देशमुख -:-:-

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